बी०एस०एफ० BSF : क्रीक क्रोक्रोडाइल कमांडो

पाकिस्तान, ऐसा नासूर जो हर दूसरे दिन हिंदुस्तान के लिए नई आफत खड़ी करता है। जहां से घुसपैठिए हर वक्त भारत में घुसने और आतंक मचाने की टोह में रहते हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि हमारे देश में ऐसे चेहरे भी हैं जो इन घुसपैठियों का काल बनते हैं।  इन चेहरों को तैयार करता है  बी०एस०एफ० BSF  यानि सीमा सुरक्षा बल 
ये कमांडो दुश्मन के बगल में मौजूद रहेगा, लेकिन उसे उसकी भनक तक न लगेगी। उसका वेष, उसका भेष, उसके रंग, उसकी चाल, आसपास के माहौल और मौसम में जैसे घुल जाती है। वो जंगल के सबसे खतरनाक शिकारी मगरमच्छ से प्रेरणा लेता है। जिस तरह मगरमच्छ अपने शिकारी के करीब आने का इंतजार करता है, जिस तरह मगरमच्छ घैर्य रखते हुए बेहद खामोश रहता है। पानी में सिर्फ आंखें नजर आती हैं। उसी तरह ये कमांडो भी भारत पाकिस्तान की सरहद पर मौजूद दलदली इलाके में चौबीसों घंटे रहते हैं। उसी तरह पानी में डूबे हुए, कीचड़ में सने हुए, घंटों घंटे पड़े रहते हैं। गुजरात के इस सर क्रीक इलाके में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों, अपराधियों और स्मगलरों के इंतजार में भारत की सरहद के ये प्रहरी हैं

गुजरात में भारत-पाकिस्तान सीमा पर सरक्रीक के दरियाई इलाके में तैनाती की वजह से इन्हें क्रीक क्रोक्रोडाइल कमांडोज कहा जाता है। ये जमीन और पानी दोनों ही जगह पर एक जैसे हमला कर दुशमन को चौंका कर उन्हें नेस्तनाबूद कर सकते हैं। 2008 यानि वो साल जब 26 नवंबर को पाकिस्तान की तरफ से भारत पर सबसे भयानक आतंकवादी हमला हुआ, जब समुद्र के रास्ते आए 10 आत्मघाती हमलावरों ने भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई को लहुलूहान कर डाला, दो सौ से ज्यादा बेगुनाहों का खून बहा और इस देश ने एक सबक लिया कि समुद्र के उस हिस्से को पाकिस्तानी घुसपैठियों का श्मशान बना डालेंगे जहां से वो कुबेर नाम की भारतीय बोट को अगवा कर भारत में चोरी छिपे घुसे थे। उसी के बाद से गुजरात के सरक्रीक की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए बीएसएफ बनाने लगी फौलादी कमांडो। 
सर क्रीक दरअसल 96 किलोमीटर लंबा दलदली इलाका है जो भारत और पाकिस्तान को बांटता है। क्रीक अरब सागर से जुड़ी हुई है और जहां इससे लगा हुआ भारत का गुजरात राज्य है। वहीं पाकिस्तान का सिंध प्रांत है। सर क्रीक में समुद्र के दलदली पानी में उगलने वाले मैंग्रूव्स का जंगल है। यही इलाका मगरमच्छ और समुद्री सांप और कीड़े मकौड़ों का भी घर है। चारों तरफ दलदल, खासी गर्मी और कीचड़ और हवा में घुला नमक। मई से सितंबर के बीच इस इलाके में तेज हवाएं चलती हैं और क्रीक में आने वाला समुद्री पानी में तेज लहरें भी उठती हैं। स्थानीय कच्छ की जनता इसी इलाके में मौजूद एक नाले को हरामी नाला कहती है। इसके नाम के पीछे इस नाले का अचानक बारिश में उफन जाना है और इसी नाले को घुसपैठियों का स्वर्ग भी कहा जाता है। यहीं से मछुआरों के भेष में पाकिस्तानी घुसपैठिए साल भर भारत में घुसने की ताक में रहते हैं, इसके अलावा पाकिस्तान से तस्करी का भी यही सबसे बड़ा रूट कहा जाता है।
हरामी नाले को गुजरात का सियाचिन भी कहा जाता है, उसके आसपास के इलाके की निगरानी करना बीएसएफ के क्रीक क्रोकोडाइल कमांडो के लिए भी खासा मुश्किल होता है, क्योंकि इस इलाके में वैसे तो चारों तरफ पानी है लेकिन ये पानी एक बूंद भी पिया नहीं जा सकता क्योंकि सारा पानी खारा है। इसीलिए क्रीक क्रोकोडाइल कमांडो बनाने से पहले उनकी कडी अग्निपरीक्षा ली जाती है। ऐसा कमांडो ही ये ट्रेनिंग पूरी कर पाता है जो तैरने में और समुद्र में गोताखोरी में उस्ताद हो। कमांडो का निशाना अचूक होना चाहिए और उसमें कई-कई दिन भूखा-प्यासा दलदल में रहने का नैतिक बल और साहस होना चाहिए। वैसे भी सर क्रीक के अलावा इस सरहद पर कई और भी इलाके हैं जिनकी निगरानी इन कमांडो को करनी पड़ती हैं। इनमें पीर सनाई क्रीक, पबेवारी क्रीक, व्यानवरी क्रीक, कूरी क्रीक और देवरी क्रीक शामिल हैं।
बीएसएफ ने हाल में ही राजस्थान और गुजरात की सीमा पर क्रीक क्रोक्रोडाइल कमांडो के साथ डेजर्ट स्कॉरर्पियन कमांडो की टीमें भी तैयार की हैं। घुसपैठ रोकना और रन ऑफ कच्छ जैसे दरियाई इलाके में आसमान से अचानक हमले से निपटने के लिेए दोनों टीमों को खास ट्रेनिंग दी जा रही है। क्रीक के पूरे इलाके में अरब सागर के पानी में चौबीसों घंटे निगरानी करना किसी विष रेखा से गुजरने से कम नहीं है। क्रीक क्रोकोडाइल कमांडो भी ये काम बखूबी करते हैं, जब उन्हें लेकर स्पीड बोट चलती है तो घुसपैठियों के दिल धड़कते हैं। आईबीएन7 के सामने थी एक झील जिसमें अनगिनत मगरमच्छ थे। कहीं घुसपैठियों के देखे जाने की खबर मिली। फिर क्या था मगरमच्छ के प्रतीक ये कमांड़ो अपने शिकार को रोकने निकल पड़े।
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