इंडियन मरीन कमांडो - मार्कोस

 भारत के मार्कोस (मरीन) कमांडो सबसे ट्रेंड और मार्डन माने जाते हैं। मार्कोस को दुनिया के बेहतरीन यूएस नेवी सील्स की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। मार्कोस कमांडो बनाना आसान नहीं है। इसके लिए सेलेक्‍ट होने वाले कमांडोज को कड़ी परीक्षा से गुजरना होता है। 20 साल उम्र वाले प्रति 10 हजार युवा सैनिकों में एक का सिलेक्शन मार्कोस फोर्स के लिए होता है। इसके बाद इन्हें अमेरिकी और ब्रिटिश सील्स के साथ ढाई साल की कड़ी ट्रेनिंग करनी होती है। देश के मरीन कमांडो जमीन, समुद्र और हवा में लड़ने के लिए पूरी तरह से सक्षम होते हैं।
अमेरिकी नेवी सील्स के साथ ट्रेनिंग
अमेरिकी सील्स कमांडो फोर्स और इंडियन मार्कोस फोर्स का आपस में गहरा रिश्ता है। दोनों देशों के बीच आपसी ट्रेनिंग का करार है। मार्कोस फोर्स का गठन नेवी सील्स की तर्ज पर किया गया है। अमेरिकी सील्स का नाम सी. एयर एंड लैंड से बना है। यानी इसके ट्रेंड कमांडो तीनों स्थानों पर किसी भी ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम होते हैं। 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन खात्मा यूएस नेवी सील्स के कमांडोज ने ही किया था।

Indian Navy
हाथ-पैर बंधे होने पर भी तैर सकते हैं मार्कोस
मार्कोस इंडियन नेवी के स्पेशल मरीन कमांडोज हैं। स्‍पेशल ऑपरेशन के लिए इंडियन नेवी के इन कमांडोज को बुलाया जाता है। ये कमांडो हमेशा सार्वजनिक होने से बचते हैं। मार्कोस हाथ पैर बंधे होने पर भी तैरने में माहिर होते हैं। नौसेना के सीनियर अफसर की मानें तो परिवार वालों को भी उनके कमांडो होने का पता नहीं होता है। मार्कोस का मकसद आतंकियों को उन्हीं के तरीके से मारना, जवाबी कार्रवाई, मुश्किल हालात में युद्ध करना, लोगों को बंधकों से मुक्त कराना जैसे खास ऑपरेशनों को पूरा करना है। मुबंई हमले में मार्कोस ने भी आतंकियों को काबू किया था।
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